Thursday, June 24, 2010

वजह एक इज्जत ...कब तक


.....राजधानी दिल्ली में तिन दिन में तीन अलग अलग जगहों पर हत्या वजह लेकिन एक इज्जत ...

....१८ जून २०१०...पंजाब में नवविवाहित दम्पति कि हत्या .......वजह इज्जत

....उतर प्रदेश ..सीतापुर ...बहन कि हत्या भाई ने की .........वजह इज्जत

.....३१ मार्च २०१०...अमृतसर दम्पति को गोली से उडाया....वजह इज्जत


ये तो सिर्फ बानगी भर है देश में चारो तरफ इस समय इज्जत के नाम पर अपनों का मौत के घाट उतारने का फैशन सा चल पड़ा है...........

अपनों को मरकर लोग इज्जत कमा रहे है....ये कैसी इज्जत अर्जित की जा रही है समझ से परे है......

मेरी माँ ने कभी मुझसे कहा था की आजकल के लोग बहुत समझदार हों रहे हैं...मेरे जमाने में ऐसे समझदार लोग कम मिलते है...कितना सोच समझ के एक एक कदम उठाते हैं...

लेकिन कल जब उसका फ़ोन आया तो उसकी सोच और तेवर दोनों बदले थे....

वो मुझे मेरे पत्रकारिता पहसे की दुहाई तो दे ही रही थी साथ में सवाल भी की क्या सचमुच लोग ऐसा कर रहे है या तू अपने अख़बार में ऐसा लिख रहा है ....और बेटा ये आनर किलिंग क्या है......ऐसी हत्याओं को तुम ईस सम्मान के साथ क्यों परोस रहे हों...

क्या जवाब देता की मेरे पेशे को एक नया मसाला मिल गया है...मैंने जवाब दे दिया हाँ माँ ...आजकल सच में लोग अपनों को मारने लगे है और वो भी इज्जत की खातिर....लोग बदल गये हैं तू अब उनके प्रति अपनी सोच बदल ले

माँ का जवाब था तो तुम लोग क्या कर रहे हो जिस तरह की ख़बरें तुम दे रहे हों उससे यह कम नही बढ़ेगा ....मुझे नही तुम्हे बदलने की जरूरत है खुद को भी...मतलब अपनी पत्रकारिता को और उन्हें यानि जो ऐसा कर रहे हैं उनकी मानसिकता को .....क्या बदल पाओगे...मेरी इज्जत की खातिर

माँ ने तो फ़ोन रख दिया ........मै अब तक सोच रहा हूँ ये इज्जत भी अजीब बला है ......

कोई इज्जत की दुहाई देकर अपनों के खून का प्यासा बना हुआ है....

कोई (मेरी माँ ) इज्जत की दुहाई देकर दूसरों की जिन्दगी बचाने पर तुला है ॥

इज्जत तो दोनों जगह दाँव पर है .....पर कीमत किसकी भारी है...ये तो आने वाला वक़्त तय करेगा....

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