
इज्जत कि खातिर हत्याओं का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है ...हर दिन ईस मामले से जुडी कोई न कोई घटना जरुर सामने आ जा रही है .....इज्जत कि खातिर इन हत्याओं के साथ ही खाप पंचायतों कि इज्जत भी करवटें ले रही है ...उनका तानाशाही फरमान भी इसी के साथ जारी है ...बल्कि अगर इज्जत कि खातिर हों रही इन हत्याओं को खाप के निर्णय कि अगली कड़ी कहें तो कोई गलत नही होगा...
देश में इन पंचायतों का फरमान जारी है और हमारे माननीय नेता उसे उचित ठहरा रहे हैं बल्कि हरयाणा जैसे प्रदेशों में तो वे खुद खाप के सदस्य कि तरह ही हैं ....तो फिर क्यूँ रुके हत्याएं..क्यूँ न मार दिया जाये
एक चीज और गौर कीजिये....खाप पंचायतें समान गोत्र में शादी को लेकर तुगलकी फरमान सुना रही है .पति पत्नी को भाई बहन बना दे रही हैं तो किसी को धमकाकर तलाक के लिए मजबूर किया जा रहा है.....
वहीं दुसरे जाती में शादी करने या प्रेम में फंस जाने के कारण इज्जत के नाम पर हत्याएं कि जा रही है ...
मतलब साफ है..कोई रास्ता नही है.....यानि अब आजाद होकर भी गुलामी ही सहनी होगी....अच्छी बात है...
प्यार पर बंदिश ...और लगा कौन रहा है जो खुद प्यार के बंधन में बंधा हुआ है ...
मै ऐसे मामलो को जानता हूँ जहाँ भाई खुद दूसरी लड़की के साथ इश्क फरमाता है लेकिन अपनी बहन को सिर्फ इसलिए मार दिया या घर से निकलने नही दे रहा कि घर कि इज्जत चली जाएगी .....
वाह रे समाज....
नही बदली मानसिकता पुरुषवादी मानसिकता,.......
खुद करो तो कोई बात नही बहन करे तो मौत कि सजा....क्या मरने के बाद समाज में उनकी नाक बहुत लम्बी दिखती है,..........मैंने तो नही देखा....जिसने मारा उसे मैंने सलाखों के पीछे अपनी नाक छिपाते देखा है....रोते देखा है ....खुद से शर्माते देखा है.......
मैंने तो नही सुना कि किसी कि बहन ने अपने भाई को इज्जत कि खातिर मार डाला हों...किसी लड़की के साथ उसे कहीं घूमते मिलने पर ...क्यूँ क्या उसे हक नही है....क्यों नही है..क्या वह समाज का हिस्सा नही ...
जवाब सीधा है ...हाँ उसे हक नही है क्यूंकि वह लडकी है और लड़कियों को लड़कों के मामले में हस्तछेप का अधिकार अभी नही मिला है .....बल्कि यह कि कभी हम मिलने नही देंगे ......
तो कुल मिलाकर वे प्यार न करें...
कुल मिलाकर वे घर के चाहरदीवारी में कैद रहें ..एक दिन उनका विवाह कर दिया जायेगा फिर ससुराल जाकर कैद हों जाएँ ....
वाह रे दुनिया ..क्या इंसाफ है तेरा ....सच इज्जत तो यहाँ पुरुषों का ही जाता है.....
झूट कहते है कहने वाले कि इज्जत लडकियों कि लूटी जाती है ....अरे इज्जत तो लडकों कि यानि पुरुष कि ही होती है जो सरेआम लुट रही है ......
अफ़सोस कि उसकी इज्जत लुट रही है पर उसे इसका एहसास तक नही हों रहा अब इसे क्या कहें....
जवाब तो देना होगा .....जैसे भी हों...इस पुरुष समाज को जवाब देना होगा ...
